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Saturday, 24 February 2018

आगामी चुनावों में महाराष्ट्र में मिलकर लड़ेंगे कांग्रेस-राकांपा

महाराष्ट्र में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। सूबे में भाजपा नीत राजग सरकार को हराने के लिए कांग्रेस और राकांपा ने आगामी चुनावों में मिलकर लडऩे का फैसला किया। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल के आवास पर महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रमुख अशोक चह्वाण और उनके राकांपा समकक्ष सुनील तटकरे के बीच बैठक हुई। इसके बाद साथ मिलकर चुनाव लडऩे की घोषणा की गई।
बाद में चह्वïाण ने बताया, 'सत्ताधारी भाजपा-शिवसेना सरकार को हराने के लिए आगामी सभी चुनावों में हमने मिलकर लडऩे का फैसला किया है। अभी यह प्राथमिक फैसला है। सीट बंटवारे की रणनीति पर विचार करने के लिए हमें एक बार फिर मिलेंगे।
सुनील तटकरे ने कहा, 'दोनों पार्टियों ने गठबंधन के अनुकूल माहौल बनाया है। हालांकि अभी हमारा पहला ध्यान भंडारा-गोंदिया और पालघर लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव हैं।
भाजपा सांसद नाना पटोले के इस्तीफे के बाद पूर्व महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया लोकसभा खाली हुई है। पटोले अब कांग्रेस में लौट आए हैं। वहीं, मुंबई के निकट पालघर लोकसभा सीट पिछले महीने भाजपा सांसद चिंतामण वांगा के निधन के कारण रिक्त हुई है। निर्वाचन आयोग ने उपचुनावों के लिए अभी तिथियों की घोषणा नहीं की है।

सिर्फ हाथ मिलाने के लिए नहीं मेरी भारत यात्रा : ट्रुडो



सिर्फ हाथ मिलाने के लिए नहीं मेरी भारत यात्रा : ट्रुडो कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने कहा कि भारत और उनके देश के रिश्ते न सिर्फ राजनीतिक मोर्चे पर आगे बढ़ेंगे बल्कि अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी संबंध मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि वह भारत सिर्फ हाथ मिलाने के लिए नहीं आए हैं। मुंबई की यात्रा पर पहुंचे ट्रुडो ने मंगलवार को कहा, 'यह यात्रा (भारत और कनाडा के बीच)

Friday, 23 February 2018

ओडिशा में हुआ पृथ्वी-दो का परीक्षण

भारत ने स्वदेशी रूप से विकसित परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मिसाइल पृथ्वी-2 का बुधवार की रात करीब साढ़े आठ बजे ओडिशा के परीक्षण केंद्र से परीक्षण किया है। इस मिसाइल को चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज के लॉन्च कॉम्प्लेक्स -3 से एक मोबाइल लॉन्चर के जरिए प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण को सफल बताया गया है। अत्याधुनिक पृथ्वी-2 मिसाइल 500 से 1,000 किलोग्राम आयुध ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल 350 किलोमीटर जमीन से जमीन मार करने की क्षमता रखती है। 

ब्रिटेन जाकर बसने वाले भारतीयों की संख्या हुई कम

ब्रिटेन जाकर बसने वाले भारतीयों की संख्या में कमी आई है। साल 2016 की तुलना में पिछले साल यानी 2017 में दस फीसद की कमी दर्ज की गई है। गुरुवार को जारी एक आंकड़े में यह दावा किया गया है।
ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीयों नागरिकों का देश के कुशल प्रवासी बल के रूप में वर्चस्व रहा है। पिछले साल जिन लोगों को स्किल्ड वर्क वीजा जारी हुए हैं, उनमें आधे से अधिक भारतीय हैं। बावजूद इसके 2016 की तुलना में 2017 में ब्रिटेन में प्रवासी भारतीयों की संख्या में दस फीसद की कमी दर्ज की गई है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि यूरोपीय संघ (ईयू) के बाहर के देशों में भारतीय नागरिक अब भी सबसे बड़े प्रवासी समूह बने हुए हैं। ये आंकड़े ब्रिटेन में छोटे और दीर्घकालिक प्रवासियों के लिए बनाई गई अनिवार्य राष्ट्रीय बीमा संख्या (निनो) के पंजीकरण पर आधारित हैं।

Thursday, 22 February 2018

शिक्षा मंत्री ने कहा संघ के स्कूलों को नहीं चलने देगी पबं. सरकार

शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा है कि सरकार बंगाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की आनुशांगिक ईकाई विद्या भारती द्वारा संचालित स्कूलों को चलने नहीं देगी। राज्य के विभिन्न भागों में खास कर उत्तर बंगाल में ऐसे 125 स्कूल चल रहे हैं। इसमें से किसी स्कूल प्रबंधन ने सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं लिया है। ऐसे स्कूलों को सरकार चलने नहीं देगी। इस तरह के राज्य के विभिन्न भागों में और 493 स्कूल चल रहे जिन पर सरकार कड़ी नजर रख रही है। जांच के बाद इन स्कूलों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। चटर्जी ने मंगलवार को विधानसभा में शिक्षा बजट पर हुई बहस के जवाबी भाषण में यह बातें कही। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में अंध धर्मांधता को बढ़ावा देनेवाली किसी तरह की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। जरूरत पडऩे पर सरकार कानूनी लड़ाई लड़ेगी और सुप्रीम कोर्ट तक भी जाएगी। बताते चलें कि अभी पिछले सप्ताह ही संघ द्वारा संचालित स्कूलों को शिक्षा विभाग के जिला निरीक्षक (डीआइ) द्वारा जारी किए गए नोटिस को रद कर दिया था।

Saturday, 2 May 2015

क्‍या है नेट न्‍यूट्रलिटी

नेट न्यूट्रलिटी का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि आखिर यह नेट न्यूट्रलिटी है क्या? दरअसल यूजर्स को इंटरनेट सर्फिंग की पूरी आजादी होनी चाहिए। इसमें किसी सर्विस या साइट एक्सेस को लेकर किसी तरह की बंदिश या राेक नहीं होनी चाहिए। यानी उपभोक्ता को डेटा पैक के लिए एक बार पेमेंट करने के बाद यह तय करने की आजादी होनी चाहिए कि वह इंटरनेट को किस तरह यूज करेगा। टेलीकॉम ऑपरेटर को अपनी सर्विस के लिए पेमेंट मिलने के बाद इस बात से कोई मतलब नहीं होना चाहिए कि कस्टमर ए साइट को देख रहा है या बी। नेट न्यूट्रलिटी का क्या है सिद्धांत इसके हिसाब से इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने उपभोक्ता को कानूनी रूप से सभी वेबसाइट और सर्विस का बराबर एक्सेस दे। कुछ सर्विस प्रोवाइडर्स के ऐसी कुछ स्कीमें लाने की वजह से यह चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें कुछ वेबसाइट्स या सर्विसेज को प्रायरिटी दी गई है या उनके साथ भेदभाव किया गया है। यानी सर्विस प्रोवाइडर्स को उपभोक्ता के साथ कॉस्ट, एक्सेस, स्पीड और कंटेंट के मामले में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। नेट न्यूट्रलिटी से ही स्टार्टअप्स बनीं दिग्गज - अगर इंटरनेट पर पहले आने वालों को स्पेशल एक्सेस मिलता तो गूगल सर्च और गूगल की ईमेल सर्विस जीमेल अभी दुनिया में सबसे आगे नहीं होती। - गूगल की सर्च सर्विस से पहले याहू की इस तरह की सर्विस और आस्क जीव्स और एल्टा विस्टा जैसे प्रॉडक्ट्स थे। माइक्रोसॉफ्ट की हॉटमेल का दबदबा होने के बाद जीमेल लॉन्च की गई थी। - नेट न्यूट्रलिटी की वजह से ही गूगल की ऑरकुट को मार्क जकरबर्ग की सोशल नेटवर्क साइट फेसबुक ने मार्केट से बाहर कर दिया। फेसबुक ने रुपर्ट मर्डोक की मायस्पेस को भी पीछे छोड़ा था। - माइक्रोसॉफ्ट ने इंटरनेट पर मोजैक के नाम से स्पेशल स्पेस का प्रपोजल देकर नेट नॉन-न्यूट्रलिटी की एक शुरुआती कोशिश की थी। इसके जवाब में मोजिला आया, यह एक ब्राउजर है जो ओपन सोर्स पर काम करता है। - अगर टेलीकॉम कंपनियां एसएमएस को विशेष फायदा दे सकतीं तो आज वॉट्सएप मेसेजिंग सर्विस का नामोनिशान नहीं होता।